अस्पताल में गूंजी चार नन्हीं किलकारियां, महिला ने दिया 4 बेटियों को जन्म
सुदूर ऑस्ट्रेलिया में चिकित्सा जगत से जुड़ा एक बेहद दुर्लभ और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने दुनियाभर के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। यहां 34 वर्षीय एक महिला ने प्राकृतिक रूप से गर्भधारण के बाद चार एक जैसी (आइडेंटिकल) बेटियों को एक साथ जन्म दिया है। इस अनोखी घटना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि चारों बच्चियां केवल एक ही निषेचित (फर्टिलाइज्ड) अंडे से विकसित हुई थीं, जो बाद में आगे चलकर चार अलग-अलग हिस्सों में विभाजित हो गया। मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, चिकित्सा इतिहास में इस तरह के मामले न के बराबर देखने को मिलते हैं और संभवतः ऑस्ट्रेलिया के चिकित्सा जगत में अपनी तरह का यह पहला अनूठा मामला है।
गर्भावस्था में थे गंभीर जोखिम, डॉक्टरों की विशेष देखरेख से जच्चा-बच्चा सुरक्षित
गर्भावस्था के इस पूरे सफर के दौरान मां और चारों बच्चों की जान को कई तरह के गंभीर चिकित्सीय जोखिमों का सामना करना पड़ा था, लेकिन डॉक्टरों की चौबीसों घंटे की कड़ी निगरानी और सफल इलाज के चलते आज मां और चारों नवजात बच्चियां पूरी तरह सुरक्षित हैं। आइए जानते हैं इस अद्भुत और दुर्लभ मेडिकल मामले की पूरी दास्तान।
क्वींसलैंड के अस्पताल में जन्मी चार आइडेंटिकल बेटियां, 1.5 करोड़ में एक होता है ऐसा मामला
ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड स्थित प्रसिद्ध 'रॉयल ब्रिस्बेन एंड विमेन्स हॉस्पिटल' में 34 वर्षीय महिला जेनीटार नाआमोआना ने एक साथ चार एक जैसी बेटियों को जन्म दिया। यह गर्भधारण पूरी तरह सामान्य नहीं था, क्योंकि चारों बच्चियों का विकास एक ही फर्टिलाइज हुए अंडे से हुआ था, जो बाद में चार भागों में बंट गया। विज्ञान की भाषा में इसे अत्यंत दुर्लभ श्रेणी में गिना जाता है।
चिकित्सकों के अनुसार, प्राकृतिक रूप से एक ही निषेचित अंडे का चार हिस्सों में विभाजित होकर चार स्वस्थ बच्चों को जन्म देना लगभग 1.5 करोड़ गर्भधारण में केवल एक बार होने वाली घटना है। यही वजह है कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के मुताबिक, जेनीटार नाआमोआना और उनके पति जॉर्थम पहले से ही चार बच्चों के माता-पिता हैं और उन्होंने दोबारा संतान प्राप्ति की कोई योजना नहीं बनाई थी। ऐसे में जब शुरुआती जांच के दौरान यह पता चला कि गर्भ में चार बच्चे पल रहे हैं, तो पूरा परिवार हैरान रह गया था।
एक ही प्लेसेंटा साझा कर रहे थे चारों भ्रूण, 28वें हफ्ते में हुआ सफल सिजेरियन ऑपरेशन
सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि चारों भ्रूण एक ही 'प्लेसेंटा' (अपरा) को साझा कर रहे थे, जिसकी वजह से समय से पहले प्रसव (प्री-मैच्योर डिलीवरी), गर्भपात और अन्य जानलेवा जटिलताओं का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया था। इसी जोखिम को देखते हुए डॉक्टरों की एक विशेष मेडिकल टीम ने गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों से ही महिला की लगातार मॉनिटरिंग शुरू कर दी थी। महिला को गर्भावस्था के 25वें सप्ताह में एहतियात के तौर पर अस्पताल में ही भर्ती कर लिया गया था।
अंततः 14 जुलाई को, जब गर्भावस्था का समय 28 सप्ताह और 4 दिन का हो गया, तब डॉक्टरों ने बिना कोई जोखिम उठाए एक सफल सिजेरियन ऑपरेशन (C-Section) के जरिए चारों नवजात बच्चियों का सुरक्षित प्रसव कराया। वर्तमान में चारों नन्हीं बच्चियां अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में बाल रोग विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, चारों बच्चियां स्वस्थ हैं और उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है।
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