पाक-सऊदी रक्षा समझौते पर ईरान ने जताई खुशी
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल ही में एक रक्षा समझौता हुआ है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अब बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए ऐतिहासिक रक्षा समझौते का स्वागत किया. उन्होंने इसे सम्पूर्ण क्षेत्रीय सुरक्षा सिस्टम की शुरुआत बताया.
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए इस रक्षा समझौते के तहत अब अगर पाकिस्तान या सऊदी अरब पर कहीं से भी हमला होता है, तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा और दोनों देश मिलकर इसका जवाब देंगे. यह समझौता पिछले हफ्ते रियाद के अल-यमामा पैलेस में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने साइन किया.
मुस्लिम देशों के लिए क्यों है अहम?
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में बोलते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, ईरान, सऊदी और पाकिस्तान के इस रक्षा समझौते का स्वागत करता है. यह पश्चिम एशिया के मुस्लिम देशों के बीच राजनीति, सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में सहयोग से एक व्यापक सुरक्षा सिस्टम की शुरुआत है.
ईरान और सऊदी के रिश्ते
ईरान और सऊदी अरब पहले कई क्षेत्रीय संघर्षों (जैसे सीरिया और यमन) में आमने-सामने रहे हैं. दोनों ने 2016 में राजनयिक रिश्ते तोड़ दिए थे, लेकिन 2023 में चीन की मध्यस्थता से रिश्ते दोबारा शुरू किए. इसके बाद से दोनों देशों के रिश्ते सुधर रहे हैं और उच्च-स्तरीय मुलाकातें हो रही हैं. सऊदी अरब ने मई में ईरान पर इजराइली हमलों की निंदा की थी.
परमाणु हथियार को लेकर क्या बोले?
इस बीच परमाणु निर्माण को लेकर राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने अहम बात की. उन्होंने कहा, ईरान का परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है. पेजेश्कियन ने कहा, मैं इस सभा के सामने एक बार फिर ऐलान करता हूं कि ईरान ने कभी परमाणु बम बनाने की कोशिश नहीं की है और न ही कभी करेगा. हम परमाणु हथियार नहीं चाहते.
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को उस समय संबोधित किया जब कुछ ही महीने पहले इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे और यूरोपीय देशों ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नए प्रतिबंध लगा दिए थे. इन हालातों के बावजूद पेजेशकियन ने अपने भाषण में साफ-साफ दोहराया कि ईरान का मकसद कभी परमाणु हथियार बनाना नहीं रहा और न ही आगे ऐसा करने का इरादा है.
उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों का रवैया ईरान के प्रति दुर्भावनापूर्ण है और वो जानबूझकर ईरान को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि ईरान का सहयोग कम होना किसी “गुप्त हथियार योजना” की वजह से नहीं, बल्कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 2015 के परमाणु समझौते से अचानक पीछे हटने के कारण है. इस समझौते को औपचारिक रूप से संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) कहा जाता है, जिसके तहत ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिलने वाली थी, बदले में वह परमाणु हथियारों से दूरी बनाए रखेगा.
पेजेशकियन ने यह तर्क दिया कि जब ट्रंप प्रशासन ने समझौते को तोड़ दिया और ईरान पर दोबारा कड़े प्रतिबंध लगाए, तब ईरान के पास भी अपनी रक्षा और परमाणु कार्यक्रम को लेकर कुछ कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अगर असल में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय निष्पक्षता और ईमानदारी से काम करे, तो ईरान सहयोग के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन एकतरफा दबाव और अनुचित आरोप स्वीकार्य नहीं होंगे.
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